छाई जाती है ये वहशत कैसी घर बयाबान हुआ जाता है

“What wild desolation is this that casts its shadow, as my very home turns into a barren wilderness.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

यह कैसा डर और अकेलापन छाता जा रहा है कि घर एक वीराना बनता जा रहा है।

विस्तार

इस शेर में शायर अकेलेपन और उदासी की उस गहरी कैफियत को बयान कर रहे हैं, जो इंसान को अंदर से खोखला कर देती है। 'वहशत' यानी बेकरारी और बेचैनी का असर ऐसा है कि सुकून और पनाह देने वाला अपना ही घर किसी वीरान बयाबान जैसा लगने लगा है। यह दिल की उस तन्हाई को दर्शाता है जहाँ बाहर की दुनिया नहीं, बल्कि मन की उदासी चारदीवारी को भी एक सूने रेगिस्तान में बदल देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.