ग़ज़ल
दिल परेशान हुआ जाता है
دل پریشان ہوا جاتا ہے
यह ग़ज़ल हृदय की बेचैनी और रूहानी बदलाव की दास्तान बयान करती है। इसमें दिखावटी तक़वे और ज़ाहिद की ज़ाहिरदारी पर तंज़ करते हुए पीर-ए-मुग़ाँ की ख़िदमत और इश्क़-ए-हक़ीक़ी को ही सच्चा इंसान बनने की राह बताया गया है।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
दिल परेशान हुआ जाता है
और सामान हुआ जाता है
दिल लगातार बेचैन और परेशान होता जा रहा है, और अधिक परेशानी का सामान (कारण) तैयार होता जा रहा है।
2
ख़िदमत-ए-पीर-ए-मुग़ाँ कर ज़ाहिद
तू अब इंसान हुआ जाता है
ऐ ज़ाहिद, तू मैख़ाने के बुज़ुर्ग (पीर-ए-मुग़ाँ) की ख़िदमत कर, क्योंकि अब तू आख़िरकार एक सच्चा इंसान बनने जा रहा है।
3
मौत से पहले मुझे क़त्ल करो
उस का एहसान हुआ जाता है
प्राकृतिक मौत आने से पहले तुम ही मुझे मार डालो, क्योंकि मुझ पर मौत का एहसान बढ़ता जा रहा है।
4
लज़्ज़त-ए-इश्क़ इलाही मिट जाए
दर्द अरमान हुआ जाता है
हे ईश्वर, प्रेम का यह मज़ा मिट जाए, क्योंकि इसका दर्द ही अब एक चाहत बनता जा रहा है।
5
दम ज़रा लो कि मिरा दम तुम पर
अभी क़ुर्बान हुआ जाता है
ज़रा दम लो और ठहर जाओ, क्योंकि मेरी जान अभी तुम पर न्योछावर होने ही वाली है।
6
गिर्या क्या ज़ब्त करूँ ऐ नासेह
अश्क पैमान हुआ जाता है
ऐ नसीहत करने वाले, मैं अपना रोना कैसे रोकूँ जब मेरे आँसू हद से बढ़कर छलकते हुए प्याले की तरह बहे जा रहे हैं।
7
बेवफ़ाई से भी रफ़्ता रफ़्ता
वो मिरी जान हुआ जाता है
अपनी बेवफ़ाई के बावजूद वह इंसान धीरे-धीरे मेरी जान बनता जा रहा है।
8
अर्सा-ए-हश्र में वो आ पहुँचे
साफ़ मैदान हुआ जाता है
वे क़यामत के मैदान में आ पहुँचे हैं और उनके आते ही सारा मैदान ख़ाली हुआ जा रहा है।
9
मदद ऐ हिम्मत-ए-दुश्वार-पसंद
काम आसान हुआ जाता है
हे कठिनाइयों को पसंद करने वाली हिम्मत, मेरी सहायता कर, क्योंकि मेरा काम तो आसान होता जा रहा है।
10
छाई जाती है ये वहशत कैसी
घर बयाबान हुआ जाता है
यह कैसा डर और अकेलापन छाता जा रहा है कि घर एक वीराना बनता जा रहा है।
11
शिकवा सुन आँख मिला कर ज़ालिम
क्यूँ पशेमान हुआ जाता है
ऐ ज़ालिम, नज़रें मिलाकर मेरी शिकायत सुन; तू इस तरह शर्मिंदा और पछतावे से भरा क्यों हुआ जा रहा है?
12
आतिश-ए-शौक़ बुझी जाती है
ख़ाक अरमान हुआ जाता है
शौक़ और चाहत की आग बुझती जा रही है, और दिल के सारे अरमान ख़ाक में मिलते जा रहे हैं।
13
उज़्र जाने में न कर ऐ क़ासिद
तू भी नादान हुआ जाता है
ऐ संदेशवाहक, जाने से बचने के बहाने मत बना; क्या तू भी इतना नादान होता जा रहा है?
14
मुज़्तरिब क्यूँ न हों अरमाँ दिल में
क़ैद मेहमान हुआ जाता है
दिल में मौजूद अरमान बेचैन क्यों न हों, जब यहाँ आया मेहमान ही क़ैद हुआ जा रहा है।
15
'दाग़' ख़ामोश न लग जाए नज़र
शे'र दीवान हुआ जाता है
ऐ दाग़, अब ख़ामोश हो जाओ ताकि किसी की बुरी नज़र न लग जाए, क्योंकि तुम्हारा एक ही शे'र अब पूरा दीवान बनता जा रहा है।
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