उज़्र जाने में न कर ऐ क़ासिद तू भी नादान हुआ जाता है

“Make no excuse to go, O messenger; have you, too, grown so naive?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

ऐ संदेशवाहक, जाने से बचने के बहाने मत बना; क्या तू भी इतना नादान होता जा रहा है?

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने क़ासिद यानी संदेशवाहक को बड़े अपनेपन से उलाहना दे रहा है, जो महबूब तक पैग़ाम ले जाने में तरह-तरह के बहाने बना रहा है। शायद क़ासिद महबूब के मिज़ाज, बेरुख़ी या सख़्ती से डर गया है, लेकिन आशिक़ उसे 'नादान' कहते हुए समझाता है कि इश्क़ में ऐसी हिचकिचाहट नहीं चलती। यह शेर आशिक़ की उस तड़प को बयान करता है जहाँ दिल का पैग़ाम पहुँचाना हर डर और ख़तरे से कहीं ज़्यादा ज़रूरी होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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