“The fire of passion is dying out, every yearning turns to dust.”
शौक़ और चाहत की आग बुझती जा रही है, और दिल के सारे अरमान ख़ाक में मिलते जा रहे हैं।
यह शेर दिल की उस बेबसी और ख़ामोश उदासी को बयान करता है, जब इंसान के अंदर की उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं। शायर ने इश्क़ के जुनून को आग और ख़्वाहिशों को राख की तरह पेश किया है; जो जज़्बा कभी दिल को रौशन रखता था, अब वह धीरे-धीरे बुझ रहा है और सारे अरमान मिट्टी में मिल रहे हैं। यह दर्द की वह इंतिहा है जहाँ चीख़-पुकार नहीं, बल्कि सिर्फ़ एक गहरा सन्नाटा और मायूसी रह जाती है।
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