इधर आईना है उधर दिल है जिस को चाहा उठा के देख लिया

“Here lies the mirror, and there rests the heart; whichever one fancied was lifted to gaze upon.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

एक तरफ आईना रखा है और दूसरी तरफ दिल है; जिसे भी चाहा, उसे उठाकर देख लिया।

विस्तार

उर्दू शायरी में आईना और दिल दोनों ही अक्स यानी परछाईं दिखाने का ज़रिया हैं, लेकिन एक चेहरा दिखाता है और दूसरा रूह का सच। शायर ने कितनी सादगी से दोनों को आमने-सामने रख दिया है, मानो ज़ाहिरी हुस्न को निहारना हो या अंदरूनी जज़्बातों और दर्द को देखना, यह बस अपनी पसंद का मामला हो। यह शेर हमें याद दिलाता है कि इंसान चाहे तो दुनियावी दिखावे में उलझ कर रह जाए, या फिर दिल की गहराइयों में झांककर अपनी असलियत से रूबरू हो जाए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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