ग़ज़ल
ग़ैर को मुँह लगा के देख लिया
غیر کو منہ لگا کے دیکھ لیا
इस ग़ज़ल में शायर ने इश्क़ में मिली मायूसी और दिल के हाथों खाए धोखों का दर्द बयां किया है। अपने दिल की बात मानकर और हर सच-झूठ को परखने के बाद, उन्हें केवल उपेक्षा और पछतावा ही हासिल हुआ।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
ग़ैर को मुँह लगा के देख लिया
झूट सच आज़मा के देख लिया
मैंने ग़ैर (अजनबी या प्रतिद्वंद्वी) को अहमियत देकर उसका अंजाम देख लिया है, और सच व झूठ को अच्छी तरह परख कर आज़मा लिया है।
2
उन के घर 'दाग़' जा के देख लिया
दिल के कहने में आ के देख लिया
ऐ 'दाग़', मैंने अपने दिल की बातों में आकर उनके घर जाकर देख लिया और उसका अंजाम भी भुगत कर देख लिया।
3
कितनी फ़रहत-फ़ज़ा थी बू-ए-वफ़ा
उस ने दिल को जला के देख लिया
वफ़ा की ख़ुशबू कितनी ताज़गी और ख़ुशी देने वाली थी, लेकिन उसने इसे परखने के लिए दिल को जलाकर देख लिया।
4
कभी ग़श में रहा शब-ए-वा'दा
कभी गर्दन उठा के देख लिया
मुलाक़ात के वादे की रात, कभी तो मैं इंतज़ार में बेहोश पड़ा रहा और कभी गर्दन उठाकर देखने लगा कि महबूब आया या नहीं।
5
जिंस-ए-दिल है ये वो नहीं सौदा
हर जगह से मँगा के देख लिया
यह दिल की चीज़ है, कोई आम बाज़ारी सौदा नहीं है; मैंने इसे हर जगह से मँगवा कर देख लिया है।
6
लोग कहते हैं चुप लगी है तुझे
हाल-ए-दिल भी सुना के देख लिया
लोग कहते हैं कि तुम चुप हो गए हो, जबकि मैंने तो तुम्हें अपने दिल का हाल भी सुना कर देख लिया है।
7
जाओ भी क्या करोगे मेहर-ओ-वफ़ा
बार-हा आज़मा के देख लिया
जाने भी दो, अब प्यार और वफ़ादारी दिखाकर क्या करोगे? मैंने तुम्हें कई बार परख कर देख लिया है।
8
ज़ख़्म-ए-दिल में नहीं है क़तरा-ए-ख़ूँ
ख़ूब हम ने दिखा के देख लिया
दिल के ज़ख़्म में ख़ून की एक बूँद भी बाक़ी नहीं बची है, हमने इसे अच्छी तरह दिखा कर और परख कर देख लिया है।
9
इधर आईना है उधर दिल है
जिस को चाहा उठा के देख लिया
एक तरफ आईना रखा है और दूसरी तरफ दिल है; जिसे भी चाहा, उसे उठाकर देख लिया।
10
उन को ख़ल्वत-सरा में बे-पर्दा
साफ़ मैदान पा के देख लिया
रास्ता साफ़ पाकर और कोई रुकावट न देखकर, मैंने प्रियतम को उनके एकांत कक्ष में बिना पर्दे के देख लिया।
11
उस ने सुब्ह-ए-शब-ए-विसाल मुझे
जाते जाते भी आ के देख लिया
मिलन की रात के बाद की सुबह, वह जाते-जाते भी एक बार लौटकर मुझे देख गई।
12
तुम को है वस्ल-ए-ग़ैर से इंकार
और जो हम ने आ के देख लिया
आप ग़ैर (प्रतिद्वंद्वी) से मिलने की बात से इनकार करते हैं, लेकिन अगर हमने आकर अपनी आँखों से देख लिया तो क्या होगा?
13
'दाग़' ने ख़ूब आशिक़ी का मज़ा
जल के देखा जला के देख लिया
'दाग़' ने आशिक़ी का मज़ा पूरी तरह से चख लिया है, उन्होंने ख़ुद भी जलकर देख लिया और दूसरों को भी जलाकर देख लिया।
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