“Writhe once more, O foolish heart, for rivals mock and sneer: When nothing else availed at last, he resigned himself to bear.”
ऐ नादान दिल! तू फिर से तड़प उठ, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी ताना दे रहे हैं कि जब आख़िरकार उससे कुछ न बन पड़ा, तो उसने लाचार होकर सब्र कर लिया।
यहाँ शायर अपने नादान दिल को फिर से बेचैन होने और तड़पने के लिए कह रहा है। उसने दर्द से थककर सब्र इसलिए किया था ताकि दिल को थोड़ा सुकून मिले, लेकिन रक़ीबों ने ताना मार दिया कि जब कोई चारा न रहा तो बेबस होकर चुप बैठ गया। अपने प्यार और खुददारी पर यह लाचारी का इल्ज़ाम आशिक़ को गवारा नहीं, इसलिए वह खामोश रहने के बजाय अपनी तड़प से साबित करना चाहता है कि उसका इश्क़ अभी हारा नहीं है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
