किसी तरह जो न उस बुत ने ए'तिबार किया मिरी वफ़ा ने मुझे ख़ूब शर्मसार किया

“When by no means that stone idol could be brought to trust, my own fidelity put me thoroughly to shame.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

जब उस पत्थर दिल महबूब ने किसी भी तरह मुझ पर भरोसा नहीं किया, तो मेरी अपनी ही वफ़ा ने मुझे बहुत शर्मिंदा किया।

विस्तार

शायर अपने महबूब को 'बुत' यानी पत्थर की बेजान मूरत कहता है, जिसे हर कोशिश के बाद भी उसकी मोहब्बत पर यक़ीन नहीं आया। इस शेर की विडंबना यह है कि वफ़ादारी आशिक़ का सबसे बड़ा फ़ख़्र होती है, लेकिन यहाँ वही वफ़ा उसके लिए शर्मिंदगी बन गई। जब महबूब का दिल ज़रा भी न पिघला, तो आशिक़ को अपनी ही बेपनाह मोहब्बत पर पछतावा होने लगा कि उसने एक पत्थर के आगे अपनी सारी लाज क्यों लुटा दी।

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किसी तरह जो न उस बुत ने ए'तिबार किया | Sukhan AI