जब उन को तर्ज़-ए-सितम आ गए तो होश आया बुरा हो दिल का बुरे वक़्त होश्यार किया

“My senses returned only once they had mastered the art of cruelty; woe to this heart of mine, which chose the worst hour to awaken.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मुझे होश तब आया जब उन्हें ज़ुल्म करने के तरीके आ गए; इस दिल का बुरा हो जिसने मुझे इतने गलत और बुरे वक़्त पर सावधान किया।

विस्तार

शायर यहाँ बड़े ही तंज़िया और मासूम अंदाज़ में अपने नादान दिल पर झल्ला रहा है। जब तक महबूब को सितम ढाने का सलीका नहीं आता था, तब तक दिल बेख़बर रहकर सुकून में था; मगर जैसे ही वह ज़ुल्म करने के हुनर में माहिर हुआ, दिल अचानक होश में आ गया। यह बेवक़्त की होशियारी शायर के लिए मुसीबत बन गई, क्योंकि अब महबूब की हर बेरुख़ी और सितम का दर्द साफ़-साफ़ महसूस हो रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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