“Even the blazing sun of Doomsday would turn into a mere black mole, upon the dazzling face revealed by this dark, disgraced scar.”
अगर इस काले चेहरे वाले 'दाग़' ने वह रोशन चेहरा ज़ाहिर कर दिया, तो क़यामत का प्रचंड सूरज भी उसके आगे सिर्फ़ एक काला तिल बनकर रह जाएगा।
इस शेर में दाग़ देहलवी अपने ख़ास अंदाज़ में महबूब के हुस्न की बेपनाह चमक का बयान कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वह नूरानी चेहरा सामने आ जाए, तो क़यामत का तपता हुआ और अंधा कर देने वाला सूरज भी उसके आगे केवल एक छोटा सा काला तिल बनकर रह जाएगा। यहाँ शायर ने अपने तख़ल्लुस 'दाग़' और ख़ुद को 'सियह-रू' (गुनाहगार या काले मुँह वाला) कहकर बहुत ख़ूबसूरत लफ़्ज़ी खेल रचा है, जहाँ महबूब का हुस्न पूरी कायनात की रौशनी को मात दे देता है।
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