वो बात कर जो कभी आसमाँ से हो न सके सितम किया तो बड़ा तू ने इफ़्तिख़ार किया

“Accomplish that which the heavens themselves could never do; if cruelty is all you wrought, why take such pride in you?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

ऐसा कोई काम करके दिखा जो कभी आसमान से भी न हो सके; अगर तूने केवल ज़ुल्म ही किया है, तो इस पर इतना घमंड क्या करना।

विस्तार

उर्दू शायरी में 'आसमाँ' को ज़ुल्म और बेवफ़ाई करने वाली बेरहम क़िस्मत का प्रतीक माना गया है। शायर यहाँ महबूब पर तंज़ कसते हुए कहता है कि अगर तुमने सिर्फ़ सितम ही ढाया, तो इस पर इतना घमंड क्यों? यह काम तो पत्थर-दिल आसमान भी सदियों से करता आया है; तारीफ़ तो तब होती जब तुम वो कर दिखाते जो आसमाँ कभी न कर सका—यानी रहमदिली और सच्ची मोहब्बत।

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