“The heavens could not master the ways of Doomsday's strife; at last, it made of you the great turmoil of this life.”
आसमान से क़यामत बरपा करने के तौर-तरीक़े ठीक से निभाए नहीं जा रहे थे, इसलिए आख़िरकार उसने तुम्हें इस ज़माने की आफ़त और हलचल बना दिया।
शायर यहाँ महबूब की दिलकश और बेचैन कर देने वाली ख़ूबसूरती पर एक अनोखा अंदाज़ अपनाते हुए कहता है कि आसमान से दुनिया में वैसी क़यामत बरपा नहीं हो पा रही थी जैसी वो चाहता था। थक-हारकर उसने तुम्हें ही इस ज़माने की सबसे बड़ी हलचल और फ़ितना बना दिया। यानी अब दुनिया में दिल और होश उड़ाने के लिए किसी और आफ़त की ज़रूरत नहीं, महबूब का हुस्न ही चलती-फिरती क़यामत है।
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