“Who is it that revealed their radiant grace upon my tomb, that from the heart arose a cry: 'Alas, made restless once again!'?”
यह किसने मेरी मज़ार (क़ब्र) पर अपना जलवा दिखाया है कि मेरे दिल से यह चीख़ उठने लगी कि हाय, मुझे फिर से बेचैन कर दिया।
इस शेर में आशिक़ की क़ब्र का एक बेहद भावुक मंज़र है, जहाँ मौत के बाद मिली शांति महबूब के क़दम पड़ते ही बिखर जाती है। जब माशूक़ मज़ार पर आकर अपना दीदार कराता है, तो बरसों से दफ़्न और ख़ामोश दिल फिर से तड़प उठता है कि 'हाय, तूने मुझे फिर से बेचैन कर दिया!' यह शेर बयां करता है कि सच्चा इश्क़ मौत से भी परे है, जहाँ मिट्टी के नीचे भी दिल महबूब की एक झलक के लिए मचल जाता है।
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