“Exchanging gestures with the rival right before my eyes; at least steal a glance my way while looking over there.”
मेरे सामने ही तुम ग़ैर से इशारे कर रहे हो; कम से कम उधर देखते हुए कभी एक नज़र इधर मेरी तरफ़ भी देख लो।
इस शेर में आशिक़ का एक मासूम सा शिकवा और उसकी बेबसी दिखाई देती है, जहाँ महबूब सबके सामने उसके रक़ीब यानी ग़ैर से इशारों में बातें कर रहा है। प्रेमी यह नहीं कहता कि तुम ग़ैर से बात मत करो, बल्कि बस इतनी सी इल्तिजा करता है कि उस तरफ़ देखते-देखते चोरी-छिपे एक नज़र मेरी तरफ़ भी घुमा लो। महबूब की ज़रा सी तवज्जोह पाने की यह तड़प दर्द और लाचारी को बड़ी खूबसूरती से बयान करती है।
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