ग़ज़ल
इधर देख लेना उधर देख लेना
ادھر دیکھ لینا ادھر دیکھ لینا
यह ग़ज़ल प्रेम के नाज़ुक इशारों, कनखियों से देखने की शोख़ी और दिल के छुपे हुए दर्द को बयां करती है। इसमें आशिक़ अपने चारागर (वैद्य) से गुज़ारिश करता है कि वह महज़ नब्ज़ टटोलने के बजाय दिल के गहरे ज़ख़्मों को भी महसूस करे।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
इधर देख लेना उधर देख लेना
कन-अँखियों से उस को मगर देख लेना
इधर-उधर सब तरफ देख लेना, लेकिन कनखियों यानी तिरछी नज़रों से उसे भी ज़रूर देख लेना।
2
फ़क़त नब्ज़ से हाल ज़ाहिर न होगा
मिरा दिल भी ऐ चारागर देख लेना
सिर्फ़ नब्ज़ देखने से मेरी हालत का पता नहीं चलेगा, ऐ हकीम, मेरे दिल को भी देख लेना।
3
कभी ज़िक्र-ए-दीदार आया तो बोले
क़यामत से भी पेश-तर देख लेना
जब भी कभी आमने-सामने मिलने या दीदार का ज़िक्र हुआ, तो उन्होंने यही कहा कि तुम मुझे क़यामत के दिन से भी पहले देख लेना।
4
न देना ख़त-ए-शौक़ घबरा के पहले
महल मौक़ा ऐ नामा-बर देख लेना
ऐ संदेशवाहक, घबराहट या जल्दबाज़ी में मेरा यह प्रेम-पत्र मत दे देना; पहले सही अवसर और जगह देख लेना।
5
कहीं ऐसे बिगड़े सँवरते भी देखे
न आएँगे वो राह पर देख लेना
क्या कभी किसी ऐसे बिगड़े हुए को सुधरते देखा है? तुम देख लेना, वे कभी सीधे रास्ते पर नहीं आएंगे।
6
तग़ाफ़ुल में शोख़ी निराली अदा थी
ग़ज़ब था वो मुँह फेर कर देख लेना
अनदेखी करने के अंदाज़ में भी एक अनोखी शोख़ी थी, और मुँह फेरते हुए फिर मुड़कर देख लेना तो ग़ज़ब ढा गया।
7
शब-ए-वा'दा अपना यही मश्ग़ला था
उठा कर नज़र सू-ए-दर देख लेना
वादे की रात मेरा बस यही काम था कि बार-बार नज़र उठाकर दरवाज़े की तरफ़ देखना।
8
बुलाया जो ग़ैरों को दावत में तुम ने
मुझे पेश-तर अपने घर देख लेना
अगर तुमने दूसरों को दावत में बुलाया है, तो मुझे उनसे पहले ही अपने घर पर मौजूद पाओगे।
9
मोहब्बत के बाज़ार में और क्या है
कोई दिल दिखाए अगर देख लेना
मोहब्बत के बाज़ार में इसके सिवा और क्या रखा है, अगर कोई अपना दिल दिखाए तो उसे देख लेना।
10
मिरे सामने ग़ैर से भी इशारे
इधर भी उधर देख कर देख लेना
मेरे सामने ही तुम ग़ैर से इशारे कर रहे हो; कम से कम उधर देखते हुए कभी एक नज़र इधर मेरी तरफ़ भी देख लो।
11
न हो नाज़ुक इतना भी मश्शाता कोई
दहन देख लेना कमर देख लेना
किसी श्रृंगार करने वाली स्त्री को खुद को इतना भी नाज़ुक नहीं समझना चाहिए, उसे पहले महबूब का छोटा सा मुँह और उसकी पतली कमर देख लेनी चाहिए।
12
नहीं रखने देते जहाँ पाँव हम को
उसी आस्ताने पे सर देख लेना
जहाँ वे हमें पाँव भी नहीं रखने देते, उसी चौखट पर तुम हमारा सिर देखोगे।
13
तमाशा-ए-आलम की फ़ुर्सत है किस को
ग़नीमत है बस इक नज़र देख लेना
दुनिया का तमाशा देखने की फ़ुर्सत किसे है? बस एक नज़र देख लेना ही बहुत ग़नीमत है।
14
दिए जाते हैं आज कुछ लिख के तुम को
उसे वक़्त-ए-फ़ुर्सत मगर देख लेना
आज हम तुम्हें कुछ लिखकर दे रहे हैं, लेकिन जब तुम्हें फुर्सत मिले तब इसे जरूर देख लेना।
15
हमीं जान देंगे हमीं मर मिटेंगे
हमें तुम किसी वक़्त पर देख लेना
हम ही अपनी जान देंगे और हम ही आप पर मर मिटेंगे; आप किसी भी वक़्त हमें आज़मा कर देख सकते हैं।
16
जलाया तो है 'दाग़' के दिल को तुम ने
मगर इस का होगा असर देख लेना
तुमने दाग़ के दिल को जला तो दिया है, लेकिन देख लेना इसका असर ज़रूर होगा।
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