“My true condition will not be revealed by the pulse alone; look upon my heart as well, O healer.”
सिर्फ़ नब्ज़ देखने से मेरी हालत का पता नहीं चलेगा, ऐ हकीम, मेरे दिल को भी देख लेना।
शायर यहाँ अपने चारागर यानी हकीम से मुख़ातब होकर कह रहे हैं कि सिर्फ़ नब्ज़ थामने से उनकी असल बीमारी पकड़ में नहीं आएगी। नब्ज़ तो केवल जिस्मानी हरारत और बाहरी हालत बताती है, जबकि असली चोट तो दिल पर लगी है जहाँ इश्क़ और ग़म का तूफ़ान छुपा है। यह शेर इस खूबसूरत बात को रेखांकित करता है कि रूहानी और जज़्बाती ज़ख़्मों का इलाज जिस्म के तरीक़ों से नहीं, बल्कि दिल के दर्द को समझने से ही मुमकिन है।
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