कभी ज़िक्र-ए-दीदार आया तो बोले क़यामत से भी पेश-तर देख लेना

“Whenever the talk of a glimpse arose, they would say: / 'You shall behold me even before Doomsday.'”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

जब भी कभी आमने-सामने मिलने या दीदार का ज़िक्र हुआ, तो उन्होंने यही कहा कि तुम मुझे क़यामत के दिन से भी पहले देख लेना।

विस्तार

इस शेर में महबूब की शोख़ी और दिलकश अंदाज़ बहुत सादगी से झलकता है। जब भी आशिक़ उनके दीदार की हसरत ज़ाहिर करता है, तो महबूब मुस्कुराते हुए वादा करते हैं कि क़यामत आने से पहले ही हम नज़र आ जाएँगे। इसमें एक ख़ूबसूरत तंज़ और नाज़ भी छिपा है—मानो वो कह रहे हों कि जब हमारा दीदार होगा, तो वो मंज़र ख़ुद किसी क़यामत से कम नहीं होगा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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