तमाशा-ए-आलम की फ़ुर्सत है किस को ग़नीमत है बस इक नज़र देख लेना

“Who has the leisure for the spectacle of the world? Count it a blessing just to catch a single glance.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

दुनिया का तमाशा देखने की फ़ुर्सत किसे है? बस एक नज़र देख लेना ही बहुत ग़नीमत है।

विस्तार

शायर यहाँ ज़िंदगी की रफ़्तार और दुनिया के अंतहीन मेले के बीच हमारे पास बचे कम वक़्त की बात कर रहे हैं। यह संसार एक विशाल तमाशा है जिसे पूरा देखने की मोहलत किसी को नहीं मिलती, इसलिए भागदौड़ में अगर किसी हसीन लम्हे या अपने महबूब पर बस एक नज़र भी पड़ जाए, तो उसे ही बहुत बड़ी नेमत समझना चाहिए। यह शेर हमें सिखाता है कि हर चीज़ पा लेने की हसरत के बजाय ज़िंदगी के छोटे-छोटे पलों को पूरी शिद्दत से जीना ही असली सुकून है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.