वो था जल्वा-आरा मगर तू ने मूसा न देखा न देखा न देखा न देखा

“He shone in radiant splendour, yet you, O Moses, saw not, saw not, saw not, saw not.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

वह अपने पूरे नूर और जलाल के साथ प्रकट था, लेकिन ऐ मूसा, तुमने उसे बिल्कुल नहीं देखा, नहीं देखा, नहीं देखा और नहीं देखा।

विस्तार

यह शेर हज़रत मूसा और कोह-ए-तूर के मशहूर वाकये की तरफ़ इशारा करता है, जहाँ उन्होंने ख़ुदा के दीदार की चाहत की थी। शायर बड़े प्यारे अंदाज़ में कहता है कि परवरदिगार का नूर तो पूरी शान से हर सू बिखरा हुआ था, मगर इंसानी आँखों की महदूदियत के सबब मूसा उसे समझ ही न पाए। शेर में चार बार 'न देखा' का दोहराव एक गहरी कसक पैदा करता है, मानो यह अफ़सोस जता रहा हो कि इतना खुला जलवा होने के बावजूद इंसान की नज़र महरूम रह गई।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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