उसे देख कर और को फिर जो देखे कोई देखने वाला ऐसा न देखा

“Whoever could gaze upon another after beholding that beloved—never have I seen a beholder of such a kind.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मैंने ऐसा कोई देखने वाला नहीं देखा जो उस महबूब को देखने के बाद फिर किसी और को देखे।

विस्तार

यह शेर महबूब के उस तिलिस्मी हुस्न की बात करता है, जो देखने वाले की निगाहों को हमेशा के लिए बांध लेता है। शायर का कहना है कि जिसने एक बार उस महबूब का दीदार कर लिया, उसकी आँखें फिर कभी किसी और की तरफ उठ ही नहीं सकतीं। अगर कोई ऐसा शख्स है जो उसे देखकर भी दुनिया में किसी और को देखने की हसरत रखे, तो शायर ने आज तक ऐसा बेपरवाह देखने वाला अपनी ज़िंदगी में नहीं देखा।

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