सफ़ाई है बाग़-ए-मोहब्बत में ऐसी कि बाद-ए-सबा ने भी तिनका न देखा

“Such is the swept desolation in love's garden, that even the morning breeze found not a single straw.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मोहब्बत के बाग़ में ऐसी सफ़ाई (वीरानी) है कि सुबह की ठंडी हवा को भी वहाँ एक तिनका तक दिखाई नहीं दिया।

विस्तार

यहाँ शायर 'सफ़ाई' शब्द का इस्तेमाल एक गहरे तंज़ और दर्द के साथ कर रहे हैं। यूँ तो किसी बाग़ में तिनकों और पत्तों से ही आशियाने बनते हैं, मगर इश्क़ की ज़मीन पर ऐसी वीरानी छाई है कि सुबह की ताज़ा हवा को भी कोई तिनका तक नहीं दिखा। यह शेर दिल के उजड़ने और उस सन्नाटे को दर्शाता है जहाँ मोहब्बत ने उम्मीद की हर निशानी को पूरी तरह मिटा दिया हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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