“Much had we heard of the fame of this gathering; yet coming here, nothing of what was told was seen.”
हम इस महफ़िल की बहुत चर्चा सुनते थे, लेकिन यहाँ आकर हमने वैसा कुछ भी नहीं देखा जो सुना था।
यह शेर उस गहरी निराशा को बयां करता है जो तब होती है जब हकीकत हमारी बड़ी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। शायर किसी महफ़िल की बहुत तारीफ़ और शोहरत सुनकर वहाँ खिंचा चला आया, मगर पहुँचने पर उसे वैसा कुछ भी नज़र नहीं आया। दरअसल, यह सिर्फ़ किसी सभा की बात नहीं, बल्कि ज़िंदगी के उन तमाम खोखले दावों पर तंज़ है जहाँ दूर से दिखने वाली चमक-दमक के पीछे केवल खालीपन होता है।
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