“Where lies the primal design, where any copy made anew? In all of God's creation, I have seen none like you.”
न कोई पहला रूप तुम्हारे जैसा है और न ही उसकी कोई दूसरी प्रति; ईश्वर की इस पूरी दुनिया में मैंने तुम्हारे जैसा कोई नहीं देखा।
शायर यहाँ अपने महबूब की बेमिसाल ख़ूबसूरती की तारीफ़ करते हुए कहते हैं कि न तो तुमसे पहले कोई ऐसा था और न ही तुम्हारे जैसा कोई दूसरा बन सकता है। 'नक़्श-ए-अव्वल' यानी पहली तस्वीर और 'नक़्श-ए-सानी' यानी उसकी नक़ल—दोनों ही पैमाने महबूब के सामने फ़ीके पड़ जाते हैं। यह महज़ हुस्न की बात नहीं, बल्कि एक आशिक़ की वो अक़ीदत है जिसमें पूरी क़ायनात में सिर्फ़ उसका यार ही लासानी नज़र आता है।
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