इस नहीं का कोई इलाज नहीं रोज़ कहते हैं आप आज नहीं

“For this denial of yours there is no remedy or cure; Every day you turn me away, saying: 'Not today.'”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

आपके इस इनकार का कोई इलाज नहीं है, आप हर दिन यही कह देते हैं कि आज नहीं।

विस्तार

यह शेर महबूब के उस नटखट और सताने वाले अंदाज़ को बयां करता है जहाँ वह साफ़ इनकार भी नहीं करता, बस हर रोज़ 'आज नहीं' कहकर बात टाल देता है। आशिक़ इस मीठी बेबसी में फंसा है क्योंकि यह 'नहीं' उम्मीद को पूरी तरह ख़त्म नहीं करती, बल्कि इंतज़ार को और लंबा कर देती है। इस मर्ज़ की कोई दवा नहीं, क्योंकि दिल इस रोज़-रोज़ के बहाने से तंग भी है और इसी उम्मीद के सहारे जी भी रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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