ग़ज़ल

इस नहीं का कोई इलाज नहीं

اس نہیں کا کوئی علاج نہیں
दाग़ देहलवी· Ghazal· 16 shers· radif: नहीं

यह ग़ज़ल महबूब की लगातार इनकार करने की आदत और उसके बदलते मिज़ाज पर आशिक़ की बेबसी को बयां करती है। शायर प्रेमी के रोज़-रोज़ टालमटोल करने और दिल की तड़प को नज़रअंदाज़ करने के दर्द को शिकवे और नज़ाकत भरे अंदाज़ में पेश करता है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
इस नहीं का कोई इलाज नहीं रोज़ कहते हैं आप आज नहीं
आपके इस इनकार का कोई इलाज नहीं है, आप हर दिन यही कह देते हैं कि आज नहीं।
2
कल जो था आज वो मिज़ाज नहीं इस तलव्वुन का कुछ इलाज नहीं
जो मिज़ाज कल था वह आज नहीं है; स्वभाव के इस बार-बार बदलने और अस्थिरता का कोई इलाज नहीं है।
3
आइना देखते ही इतराए फिर ये क्या है अगर मिज़ाज नहीं
आईना देखते ही आप इतराने लगे; अगर यह आपका घमंड या नाज़-नख़रा नहीं है, तो फिर और क्या है?
4
ले के दिल रख लो काम आएगा गो अभी तुम को एहतियाज नहीं
भले ही इस समय आपको इसकी कोई ज़रूरत नहीं है, फिर भी मेरा दिल लेकर अपने पास रख लीजिए, यह कभी न कभी आपके काम ज़रूर आएगा।
5
हो सकें हम मिज़ाज-दाँ क्यूँकर हम को मिलता तिरा मिज़ाज नहीं
हम तुम्हारे स्वभाव को कैसे समझ सकते हैं, जब तुम्हारा मिज़ाज हमारे मिज़ाज से मेल ही नहीं खाता।
6
चुप लगी लाल-ए-जाँ-फ़ज़ा को तिरे इस मसीहा का कुछ इलाज नहीं
तुम्हारे जीवनदायी लाल होठों पर खामोशी छा गई है, और दूसरों को नया जीवन देने वाले इस मसीहा का अब कोई इलाज नहीं है।
7
दिल-ए-बे-मुद्दआ ख़ुदा ने दिया अब किसी शय की एहतियाज नहीं
ईश्वर ने मुझे ऐसा दिल दिया है जो हर इच्छा से मुक्त है, इसलिए अब मुझे किसी भी चीज़ की ज़रूरत नहीं है।
8
खोटे दामों में ये भी क्या ठहरा दिरहम-ए-'दाग़' का रिवाज नहीं
खोटे या सस्ते दामों में भी इसकी क्या क़ीमत मानी जा सकती है, क्योंकि दाग़ लगे हुए सिक्के (या 'दाग़' के दिरहम) का तो बाज़ार में कोई चलन ही नहीं है।
9
बे-नियाज़ी की शान कहती है बंदगी की कुछ एहतियाज नहीं
ईश्वर की बेनियाज़ी और स्वतंत्रता की शान यह कहती है कि उसे किसी की बंदगी या इबादत की कोई ज़रूरत नहीं है।
10
दिल-लगी कीजिए रक़ीबों से इस तरह का मिरा मिज़ाज नहीं
आप रक़ीबों से दिल-लगी और हँसी-मज़ाक़ कीजिए, मेरा स्वभाव इस तरह का नहीं है।
11
इश्क़ है पादशाह-ए-आलम-गीर गरचे ज़ाहिर में तख़्त-ओ-ताज नहीं
इश्क़ पूरी दुनिया पर राज करने वाला बादशाह है, भले ही ज़ाहिर तौर पर उसके पास कोई तख़्त और ताज नहीं है।
12
दर्द-ए-फ़ुर्क़त की गो दवा है विसाल इस के क़ाबिल भी हर मिज़ाज नहीं
यद्यपि जुदाई के दर्द का इलाज मिलन ही है, लेकिन हर किसी का स्वभाव या मिज़ाज इस मिलन को संभालने के योग्य नहीं होता।
13
यास ने क्या बुझा दिया दिल को कि तड़प कैसी इख़्तिलाज नहीं
निराशा ने दिल को ऐसा बुझा दिया है कि तड़पना तो दूर, इसमें धड़कन या बेचैनी की ज़रा सी हरकत भी बाकी नहीं रही।
14
हम तो सीरत-पसंद आशिक़ हैं ख़ूब-रू क्या जो ख़ुश-मिज़ाज नहीं
हम ऐसे प्रेमी हैं जो रूप-रंग से ज़्यादा अच्छे स्वभाव और चरित्र को पसंद करते हैं; ऐसे सुंदर चेहरे का क्या फ़ायदा जिसका मिज़ाज या स्वभाव अच्छा न हो।
15
हूर से पूछता हूँ जन्नत में इस जगह क्या बुतों का राज नहीं
मैं जन्नत में हूर से पूछता हूँ कि क्या इस जगह सुंदरियों (बुतों) की हुकूमत या असर नहीं चलता।
16
सब्र भी दिल को 'दाग़' दे लेंगे अभी कुछ इस की एहतियाज नहीं
ऐ दाग़, हम दिल को सब्र भी दिला देंगे, लेकिन अभी इसकी कोई ज़रूरत नहीं है।
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