“The mood that held sway yesterday is no longer found today; for such fickle inconstancy, no remedy can make its way.”
जो मिज़ाज कल था वह आज नहीं है; स्वभाव के इस बार-बार बदलने और अस्थिरता का कोई इलाज नहीं है।
इस शेर में शायर महबूब के बदलते मिज़ाज पर एक मीठी सी बेबसी ज़ाहिर कर रहा है, जहाँ कल की अपनाइयत आज बेरुखी में बदल चुकी है। 'तलव्वुन' का मतलब है पल-पल रंग बदलना या तबीयत का चंचल होना, और शायर तस्लीम करता है कि इस बेपरवाह अंदाज़ का दुनिया में कोई इलाज नहीं है। यह इश्क़ की उस लाचारी का इज़हार है जहाँ दिल शिकवे से ज़्यादा महबूब की इस आदत पर हैरान और मजबूर नज़र आता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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