दर्द-ए-फ़ुर्क़त की गो दवा है विसाल इस के क़ाबिल भी हर मिज़ाज नहीं

“Though union is indeed the cure for separation's pain, not every temperament is fit such remedy to sustain.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

यद्यपि जुदाई के दर्द का इलाज मिलन ही है, लेकिन हर किसी का स्वभाव या मिज़ाज इस मिलन को संभालने के योग्य नहीं होता।

विस्तार

हम सब यही मानते हैं कि जुदाई के दर्द का मुकम्मल इलाज महबूब से मिलना यानी विसाल ही है, और यह बात सच भी है। मगर शायर यहाँ दिल की एक बेहद नाज़ुक हक़ीक़त बयां करता है कि हर किसी का मिज़ाज इतना मज़बूत नहीं होता जो मिलन की इस बेपनाह शिद्दत को संभाल सके। कभी-कभी आशिक़ हिज्र और तड़प का इतना आदी हो जाता है कि विसाल की बेइंतहा ख़ुशी भी उसकी रूह पर भारी पड़ जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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