“Though union is indeed the cure for separation's pain, not every temperament is fit such remedy to sustain.”
यद्यपि जुदाई के दर्द का इलाज मिलन ही है, लेकिन हर किसी का स्वभाव या मिज़ाज इस मिलन को संभालने के योग्य नहीं होता।
हम सब यही मानते हैं कि जुदाई के दर्द का मुकम्मल इलाज महबूब से मिलना यानी विसाल ही है, और यह बात सच भी है। मगर शायर यहाँ दिल की एक बेहद नाज़ुक हक़ीक़त बयां करता है कि हर किसी का मिज़ाज इतना मज़बूत नहीं होता जो मिलन की इस बेपनाह शिद्दत को संभाल सके। कभी-कभी आशिक़ हिज्र और तड़प का इतना आदी हो जाता है कि विसाल की बेइंतहा ख़ुशी भी उसकी रूह पर भारी पड़ जाती है।
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