शबनम की तरह फूलों पे रो और चमन से चल इस बाग़ में क़याम का सौदा भी छोड़ दे

“Weep like the dew upon the flowers, then depart the garden floor; abandon even the mad obsession of dwelling here forevermore.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ओस (शबनम) की तरह फूलों पर रोकर इस बाग़ से विदा हो जाओ, और यहाँ हमेशा ठहरने की धुन या ख़याल भी छोड़ दो।

विस्तार

शायर ज़िंदगी की नश्वरता को शबनम यानी ओस के ज़रिये बेहद ख़ूबसूरती से समझाते हैं। जैसे ओस की बूँद फूलों पर कुछ पल आँसू बहाकर सुबह होते ही विदा हो जाती है, वैसे ही इंसान को भी इस दुनिया में हमेशा टिके रहने का वहम छोड़ देना चाहिए। यहाँ की ख़ूबसूरती और दर्द को शिद्दत से महसूस तो करो, मगर यह याद रखो कि यह बाग़ मुसाफ़िरों का पड़ाव है, सदा रहने का ठिकाना नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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शबनम की तरह फूलों पे रो और चमन से चल | Sukhan AI