“In love the sacred rite demands one sit apart from all: forsake the temple, leave the mosque, and quit the church's hall.”
आशिक़ी का यह दस्तूर है कि सबसे अलग-थलग होकर बैठा जाए, इसलिए बुतख़ाना (मंदिर), हरम (मस्जिद) और कलीसा (गिरजाघर) सब छोड़ दो।
शायर यहाँ सच्ची मोहब्बत का एक अनूठा उसूल बयान कर रहे हैं, जहाँ प्रेम किसी भी सांसारिक या धार्मिक दायरे से परे होता है। बुतखाना, हरम और कलीसा यानी मंदिर, मस्जिद और चर्च बाहरी पूजा-पाठ और दुनियावी बँटवारे के प्रतीक हैं, जबकि सच्चा इश्क़ मुकम्मल समर्पण मांगता है। आशिक़ को सलाह दी जा रही है कि अगर महबूब की सच्ची लगन है, तो इन तमाम औपचारिक दायरों को छोड़कर दिल के उस अकेले कोने में बैठ जाओ जहाँ सिर्फ़ प्यार की इबादत होती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
