मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर फिर भी तिरा शबाब तिरा ही शबाब है

“My ardent gaze of longing is by no means lacking, yet / Your youthful splendor remains peerlessly your own.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

हालाँकि मेरी चाहत भरी निगाह भी किसी से कम नहीं है, फिर भी तुम्हारा यौवन और सौंदर्य अपनी मिसाल आप है।

विस्तार

अक्सर कहा जाता है कि ख़ूबसूरती देखने वाले की नज़र में होती है, और शायर भी मानता है कि उसकी 'निगाह-ए-शौक़' यानी चाहत भरी नज़र में कोई कमी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद वह झुककर तस्लीम करता है कि महबूब का हुस्न और उसका शबाब किसी नज़र का मोहताज नहीं है। यह शेर इश्क़ के उस ख़ूबसूरत समर्पण को दिखाता है, जहाँ आशिक़ अपनी दीवानगी से बढ़कर महबूब के बेमिसाल नूर का सजदा करता है।

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