मानूस-ए-ए'तिबार-ए-करम क्यूँ किया मुझे अब हर ख़ता-ए-शौक़ इसी का जवाब है

“Why did you accustom me to trusting in your grace? Now every fault born of desire is merely an answer to it.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

आपने मुझे अपनी मेहरबानी और इनायत पर भरोसा करने का आदी क्यों बनाया? अब मेरी चाहत में होने वाली हर ख़ता दरअसल उसी भरोसे का जवाब है।

विस्तार

शायर यहाँ बड़े नाज़ और शिकवे के मिले-जुले अंदाज़ में महबूब से कह रहा है कि तुमने मुझे अपनी बेपनाह नवाज़िशों और मेहरबानियों की आदत ही क्यों डाली? जब किसी को यह पक्का यक़ीन हो जाए कि उसके चाहने वाले का दिल बहुत बड़ा है, तो वह बेपरवाह होकर कुछ गुस्ताख़ियाँ या बेवकूफ़ियाँ भी कर बैठता है। अब मोहब्बत में जो भी भूल या ख़ता मुझसे हो रही है, वह दरअसल तुम्हारी उसी हद से ज़्यादा इनायत और दिए गए भरोसे का ही असर है।

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