अपने हुदूद से न बढ़े कोई इश्क़ में जो ज़र्रा जिस जगह है वहीं आफ़्ताब है

“Let none transgress their bounds in love's embrace; / Each speck of dust is a sun in its own place.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

इश्क़ में किसी को भी अपनी सीमा से आगे नहीं बढ़ना चाहिए, क्योंकि हर छोटा कण अपनी जगह पर सूरज की तरह महत्वपूर्ण होता है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ में मर्यादा और आत्मसम्मान का एक बेहद प्यारा सबक देता है। शायर कहते हैं कि प्यार में किसी को भी अपनी हदें लांघने या खुद को बदलने की ज़रूरत नहीं है। 'ज़र्रे' (धूल के कण) और 'आफ़्ताब' (सूरज) का ख़ूबसूरत रूपक देकर वो समझाते हैं कि इंसान जब अपने वजूद और अपनी जगह पर क़ायम रहता है, तो उसका अदना सा दिल भी सूरज की तरह रौशन और बावक़ार बन जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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