नहीं जानते कुछ कि जाना कहाँ है चले जा रहे हैं मगर जाने वाले

“They know not where they are destined to go; yet onward they journey, those bound to depart.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जाने वाले यह बिल्कुल नहीं जानते कि उन्हें कहाँ जाना है, फिर भी वे लगातार चले जा रहे हैं।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी के उस पुर-असरार सफ़र को बयां करता है, जहाँ मुसाफ़िर अपनी मंज़िल से बेख़बर होकर भी बस क़दम बढ़ाए चले जा रहे हैं। शायर ने यहाँ वजूद की बेबसी और इंसान के कभी न थमने वाले सफ़र को बेहद ख़ूबसूरती से पिरोया है, जहाँ चलना किसी तय मक़सद से नहीं बल्कि महज़ आदत या क़िस्मत का तकाज़ा बन चुका है। इसमें रास्ते की गुमशुदगी का एक मीठा सा दर्द भी है और अनजान रास्तों पर लगातार चलते रहने का अजीब सा हौसला भी।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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