तिरे इक इशारे पे साकित खड़े हैं नहीं कह के सब से गुज़र जाने वाले

“Those who once passed by everyone with a cold refusal / Now stand transfixed at a single gesture from you.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जो लोग हर किसी को 'नहीं' कहकर आगे बढ़ जाया करते थे, वे आज तुम्हारे केवल एक इशारे पर स्थिर और अवाक खड़े हैं।

विस्तार

यह शेर मोहब्बत की उस जादुई ताक़त को दर्शाता है जो सबसे बेपरवाह और मग़रूर दिल को भी झुका देती है। जो शख़्स कभी दुनिया भर को बेरुखी से ‘ना’ कहकर आगे बढ़ जाता था, आज वह महबूब के ज़रा से इशारे पर हैरान और बेबस होकर ठहर गया है। यहाँ इंसान की पुरानी अकड़ और इश्क़ के आगे उसकी चुपचाप आजिज़ी का बहुत हसीन मंज़र खींचा गया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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