मजबूरी-ए-कमाल-ए-मोहब्बत तो देखना जीना नहीं क़ुबूल जिए जा रहा हूँ मैं

“Behold the helplessness born of love's perfection: living is unacceptable to me, yet I go on living.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मोहब्बत की इंतहा की लाचारी तो देखिए कि मुझे जीना स्वीकार नहीं है, फिर भी मैं जिए जा रहा हूँ।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के उस दर्दनाक मुक़ाम की दास्तान है, जहाँ मोहब्बत अपने उरूज पर पहुँचकर इंसान को बिल्कुल लाचार कर देती है। महबूब के बिना या इस ग़म में ज़िंदा रहना दिल को एक पल के लिए भी मंज़ूर नहीं, मगर विडंबना यह है कि मरना भी अपने बस में नहीं होता। यहाँ ज़िंदगी जीने की कोई उमंग नहीं बची, बस इश्क़ की मजबूरी में सांसों का भारी बोझ बेदिली से खींचा जा रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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