रुख़्सत हुई शबाब के हमराह ज़िंदगी कहने की बात है कि जिए जा रहा हूँ मैं

“Life took its leave alongside youth; / It is merely for the saying's sake that I still live on.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

ज़िंदगी जवानी के साथ ही रुख़्सत हो गई, अब तो बस कहने की बात है कि मैं जिए जा रहा हूँ।

विस्तार

इस शेर में शायर ढलती उम्र और जवानी के खो जाने के गहरे सूनेपन को बयां कर रहे हैं। उनके लिए ज़िंदगी का असली मतलब सिर्फ साँसें लेना नहीं, बल्कि जवानी का वो जोश, उमंग और जज़्बा था जो अब जा चुका है। अब तो बस दिन कट रहे हैं और जिस्म ढोया जा रहा है, जिसे दुनिया ज़िंदा रहना कह देती है। शायर के लिए ज़िंदगी तो उसी दिन रुख़्सत हो गई थी, अब जो बाकी है वह सिर्फ एक औपचारिकता है।

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