पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं

“Once wine was life, now life itself is wine; someone keeps pouring, and I drink endlessly.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

पहले शराब ही ज़िंदगी थी लेकिन अब ज़िंदगी खुद शराब बन गई है; कोई मुझे पिला रहा है और मैं बस पिए जा रहा हूँ।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी के बदलते हुए फलसफे को बेहद खूबसूरती से बयां करता है। एक वक्त था जब शायर जीने की खुशी तलाशने के लिए शराब का सहारा लेता था, मगर अब ज़िंदगी खुद एक गहरा नशा बन चुकी है। इसमें किस्मत या उस अनदेखे साक़ी के आगे एक प्यारा सा समर्पण है, जो हर घूंट में सुख-दुख परोस रहा है और शायर बस बेसुध होकर उसे अपनाता चला जा रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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