हाँ हाँ तुझे क्या काम मिरी शिद्दत-ए-ग़म से हाँ हाँ नहीं मुझ को तिरे दामन की हवा याद

“Yes, yes—what concern have you with the fury of my grief? And yes, yes—I too recall no soothing breeze from your hem.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

हाँ, तुम्हें मेरे दुःख की तीव्रता से क्या लेना-देना है? और हाँ, मुझे भी अब तुम्हारे दामन की सुकून देने वाली हवा याद नहीं है।

विस्तार

इस शेर में रूठने, तंज़ और घायल स्वाभिमान का बड़ा ही मार्मिक मेल है। आशिक़ अपनी तड़प को छिपाने के लिए महबूब से ज़िद भरे अंदाज़ में कह रहा है कि तुम्हें मेरे दर्द की क्या परवाह, और मुझे भी तुम्हारे दामन की तसल्ली की कोई ज़रूरत नहीं रही। लेकिन यह बार-बार 'हाँ हाँ' कहना साफ़ कर देता है कि यह इनकार सिर्फ़ दिखावा है, दिल की गहराइयों में वह आज भी उसी सुकून और आंचल की ठंडी हवा को तरस रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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