“Now grant me too a tongue capable of offering thanks, if in place of a heart You have bestowed only pain.”
अगर तूने मुझे दिल के बदले सिर्फ़ दर्द दिया है, तो अब मुझे ऐसी ज़ुबान भी दे जो इस दर्द के लिए तेरा शुक्र अदा करने के क़ाबिल हो।
शायर यहाँ अपने महबूब या ख़ुदा के सामने एक बेहद नाज़ुक शिकवा और समर्पण रख रहा है। वह कहता है कि अगर सीने में धड़कते दिल की जगह सिर्फ़ दर्द ही अता किया गया है, तो कम से कम उस दर्द का शुक्रिया अदा करने की ताक़त और अल्फ़ाज़ भी बख़्शे जाएँ। इसमें तकलीफ़ से कोई बगावत नहीं, बल्कि ग़म को भी अज़ीज़ तोहफ़ा समझकर गले लगाने का एक गहरा और ख़ूबसूरत अंदाज़ झलकता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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