यूँ तड़प कर दिल ने तड़पाया सर-ए-महफ़िल मुझे उस को क़ातिल कहने वाले कह उठे क़ातिल मुझे

“So fiercely did my writhing heart torment me in the gathering crowd, / That those who called my beloved a killer turned to call me the killer aloud.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

महफ़िल में मेरे दिल ने तड़पकर मुझे इस तरह बेहाल किया कि जो लोग महबूब को क़ातिल कहते थे, वे मुझे ही क़ातिल कहने लगे।

विस्तार

इस शे’र में इश्क़ के दर्द की एक बेहद मार्मिक और चौंका देने वाली तस्वीर खींची गई है। भरी महफ़िल में जब आशिक़ का दिल हिज्र की आग में बेकाबू होकर तड़पा, तो उसकी यह खौफ़नाक छटपटाहट देखकर लोग दंग रह गए। जो लोग अब तक महबूब की बेरुख़ी देखकर उसे 'क़ातिल' कह रहे थे, वे आशिक़ की इस आत्मघाती तड़प को देखकर उल्टे उसी को अपना 'क़ातिल' ठहराने लगे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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