बे-फ़ाएदा अलम नहीं बे-कार ग़म नहीं तौफ़ीक़ दे ख़ुदा तो ये नेमत भी कम नहीं

“Sorrow is not without its purpose, nor is grief in vain; should God bestow the grace to bear it, this blessing too is no small gain.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

दुख और पीड़ा व्यर्थ नहीं होते। यदि ईश्वर इसे सहने और समझने का सामर्थ्य दे, तो यह ग़म भी किसी बड़ी नेमत से कम नहीं है।

विस्तार

इस ख़ूबसूरत शेर में शायर ग़म और तकलीफ़ को एक नए नज़रिये से देखने की बात करते हैं। वो कहते हैं कि ज़िंदगी के दुख और दर्द बेकार नहीं होते, बल्कि ये हमारे दिल को नर्म और रूह को गहरा बनाते हैं। अगर ऊपर वाला हमें इस दर्द को समझने और सहने का सलीका यानी तौफ़ीक़ बख़्श दे, तो यही ग़म इंसान के लिए किसी बड़ी नेमत से कम साबित नहीं होता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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