मेरी ज़बाँ पे शिकवा-ए-अहल-ए-सितम नहीं मुझ को जगा दिया यही एहसान कम नहीं

“No grievance against the cruel dwells upon my tongue; that they awakened me is no small kindness done.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मेरी ज़ुबान पर ज़ुल्म करने वालों की कोई शिकायत नहीं है; उन्होंने मुझे ग़फ़लत से जगा दिया, यही उनका कोई छोटा एहसान नहीं है।

विस्तार

इस शेर में शायर सितमगरों के दिए गए ज़ख्मों को एक अनोखे और गहरे नज़रिए से देखता है। वह ज़ुल्म का रोना रोने के बजाय इस बात का शुक्रगुज़ार है कि उनकी बेरुखी ने उसकी ग़फ़लत की नींद तोड़ दी और उसे दुनिया की हक़ीक़त से रूबरू कराया। यह दर्द पर गरिमा की जीत है, जहाँ किसी की दी हुई चोट इंसान को तोड़ती नहीं बल्कि हमेशा के लिए जगा देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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