मुझे दें न ग़ैज़ में धमकियाँ गिरें लाख बार ये बिजलियाँ मिरी सल्तनत ये ही आशियाँ मिरी मिलकियत ये ही चार पर

“Threaten me not in wrath, though lightning strike a hundred thousand times; this humble nest is my only empire, these few wings my sole estate.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मुझे गुस्से में धमकियाँ न दें, चाहे ये बिजलियाँ लाख बार गिरें। मेरा साम्राज्य बस यही आशियाना है और मेरी कुल दौलत सिर्फ़ ये चंद पंख हैं।

विस्तार

यहाँ शायर एक बेख़ौफ़ परिंदे की ज़ुबान से ज़ालिम तूफ़ानों और क़िस्मत की मार को चुनौती दे रहा है। आसमान की कड़कड़ाती बिजलियाँ चाहे कितना भी डरा लें, वह झुकने वाला नहीं है क्योंकि उसे अपने स्वाभिमान पर अटूट भरोसा है। तिनकों से बना यह छोटा-सा घोंसला ही उसकी सल्तनत है और उड़ने के लिए मिले ये चंद पर ही उसकी असली दौलत—यह शेर हमें सिखाता है कि जो इंसान अपनी आज़ादी में मग्न हो, उसे कोई बड़ी से बड़ी ताक़त भी डरा नहीं सकती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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