“An ecstasy of love it is, a trance of wild desire—God alone knows what vision met these eyes of mine.”
इश्क़ की एक मस्ती छाई है और चाहत की एक बेख़ुदी तारी है; ख़ुदा ही जाने कि मेरी आँखों को ऐसा क्या नज़र आ गया है।
जब नज़र किसी ऐसे हुस्न या रूहानी जमाल पर पड़ जाए जो होश ही उड़ा दे, तो दिल इसी कैफियत में डूब जाता है। शायर यहाँ मोहब्बत के उस मदहोश कर देने वाले सुरूर और दीवानगी का ज़िक्र कर रहे हैं, जहाँ इंसान खुद अपनी सुध-बुध खो बैठता है। वो हैरानी और खुशी के मिले-जुले आलम में पूछते हैं कि आख़िर आँखों ने ऐसा क्या तिलिस्म देख लिया, जिसने उन्हें इस कदर बेखुद कर दिया।
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