जब देख न सकते थे तो दरिया भी था क़तरा जब आँख खुली क़तरा भी दरिया नज़र आया

“When sight was denied, an ocean seemed merely a drop; once the eyes opened, even a drop appeared an ocean.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जब हम देख नहीं सकते थे तो दरिया भी हमें सिर्फ एक बूँद लगता था, लेकिन जब आँखें खुलीं तो एक बूँद भी दरिया की तरह दिखाई देने लगी।

विस्तार

यह शेर समझ और नज़रिए के ख़ूबसूरत बदलाव की बात करता है। जब हम अज्ञान या बेख़बरी के अंधेरे में होते हैं, तो सच्चाई का अथाह समंदर भी हमें एक मामूली बूँद जैसा लगता है। लेकिन जैसे ही हमारी चेतना की आँख खुलती है, हमें उस छोटी सी बूँद में भी पूरा समंदर लहराता हुआ दिखाई देने लगता है—यानी असली जादू बाहरी दुनिया में नहीं, हमारी दृष्टि में है।

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