हर रंग तिरे रंग में डूबा हुआ निकला हर नक़्श तिरा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा नज़र आया

“Every hue emerged steeped in your own shade; every trace seemed the imprint your footprint made.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

हर रंग तुम्हारे ही रंग में डूबा हुआ दिखाई दिया, और हर निशान तुम्हारे पैरों के तलवे की छाप जैसा नज़र आया।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ की उस कैफ़ियत का बड़ा प्यारा बयान है जहाँ उसे पूरी कायनात में सिर्फ़ अपने महबूब का ही अक्स दिखाई देता है। ज़िंदगी का हर रंग मानो महबूब के रंग में रंगा हुआ है, और दुनिया की हर चीज़ उसके गुज़रे हुए क़दमों की छाप जैसी लगती है। यह शेर दिल की ऐसी नज़र बयां करता है जो इंसान को हर ज़र्रे में सिर्फ़ उसी का जलवा देखना सिखा देती है जिससे उसे बेपनाह मोहब्बत हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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