बर्क़-ए-हवादिस अल्लाह अल्लाह झूम रही है शाख़-ए-नशेमन

“The lightning of calamities, good God! / And yet gently sways the branch that holds the nest.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

अल्लाह-अल्लाह, मुसीबतों की बिजली का आलम तो देखिए, और फिर भी घोंसले वाली डाली बेपरवाह होकर झूम रही है।

विस्तार

इस शेर में तबाही और बेपरवाह सुकून का एक अनोखा मंज़र पेश किया गया है। जब चारों तरफ़ मुसीबतों की बिजलियाँ गिर रही हैं, तब भी जिस शाख़ पर घोंसला बना है, वह ख़ौफ़ज़दा होने के बजाय हवा में बेफ़िक्र होकर झूम रही है। यह इंसान के उस हैरानकुन सब्र और रूहानी हौसले की मिसाल है, जो भारी तूफ़ानों के बीच भी अपनी शांति और वक़ार नहीं खोता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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