दिल कि मुजस्सम आईना-सामाँ और वो ज़ालिम आईना-दुश्मन

“The heart, an embodiment made of mirrors / and that cruel beloved, the mirror's sworn foe.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

दिल पूरी तरह से आईने के समान नाज़ुक और साफ़ है, जबकि वह ज़ालिम महबूब आईनों का दुश्मन है जो उसे तोड़ने पर आमादा है।

विस्तार

यहाँ शायर ने दिल की नाज़ुकी और महबूब की बेरुखी का बहुत खूबसूरत तज़ाद पेश किया है। दिल एक ऐसा आईना है जो पूरी तरह पाक, सच्चा और पारदर्शी है, मगर बेहद नाज़ुक भी है। वहीं दूसरी तरफ़ महबूब को 'आईना-दुश्मन' कहा गया है—यानी वह या तो सच देखने से कतराता है या शीशे जैसी नाज़ुक चीज़ों को बेदर्दी से तोड़ने का आदी है। यह शेर उस बेबसी को बयां करता है जहाँ सच्चाई और मासूमियत की क़ीमत दिल के टूटने से चुकानी पड़ती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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