शम्अ है लेकिन धुंदली धुंदली साया है लेकिन रौशन रौशन

“The candle burns, yet faint and hazy; the shadow lingers, radiant and bright.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

शम्अ जल तो रही है लेकिन धुंधली है, जबकि परछाईं मौजूद है मगर वह बिल्कुल रोशन और चमकदार है।

विस्तार

यह शेर एक बेहद खूबसूरत विरोधाभास पेश करता है, जहाँ रोशनी देने वाली शम्अ तो धुंधली पड़ गई है, लेकिन उसका साया गजब की चमक बिखेर रहा है। शायर यहाँ हकीकत और यादों के खेल को छू रहा है—कभी-कभी वर्तमान की मौजूदगी फीकी लगने लगती है, जबकि किसी की यादों का 'साया' दिल में सबसे ज्यादा रौशन रहता है। यह उस गहरे अहसास की बात है जहाँ बीती हुई बातें और यादें आज की हकीकत से भी ज्यादा जिंदा और चमकदार महसूस होती हैं।

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