आ कि न जाने तुझ बिन कब से रूह है लाशा जिस्म है मदफ़न

“Come, for who knows how long without you—the soul has been a corpse, the body its tomb.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

चले आओ, क्योंकि न जाने कब से तुम्हारे बिना रूह एक लाश बन चुकी है और यह शरीर उसकी क़ब्र।

विस्तार

इस शेर में जुदाई के दर्द को एक बेहद चौंकाने वाले और गहरे रूपक के ज़रिये बयां किया गया है। आमतौर पर रूह जिस्म को ज़िंदगी बख्शती है, मगर महबूब के बिना शायर की रूह ही एक बेजान लाश बन चुकी है और उसका ज़िंदा बदन उस रूह की क़ब्र बन गया है। यह महबूब को वापस लौटने की एक पुरदर्द पुकार है, जो बताती है कि इश्क़ के बिना इंसान सिर्फ़ सांस लेता हुआ एक चलता-फिरता मुर्दा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.